पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट से मिला न्याय

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दैनिक मुंबई हलचल के संपादक दिलशाद एस खान ने सुप्रीम कोर्ट की सारहना की

पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट से मिला न्याय

 

पत्रकारों से सूत्र पूछने का अधिकार नहीं है - सीजेआई, सुप्रीम कोर्ट

 

दैनिक मुंबई हलचल के संपादक दिलशाद एस खान ने सुप्रीम कोर्ट की सारहना की

 

 

नई दिल्ली : देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर निशाना साधा और चेतवानी भी दी ।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूर्ण की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19 और 22 के तहत पत्रकारों के मूल अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार के सूत्र नही पूंछ सकती है और ना ही न्यायाल । तब तक जब तक कि पत्रकारों के खिलाफ बिना जांच और पुख्ता सबूत के दर्ज मुकदमे और गवाही की जांच नही हो जाती है । आज कल देखा जा रहा है कि पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता हनन कर रही है क्यों कि अधिकतर मामले में पुलिस खुद को श्रेष्ठ बनाने के लिए ऐसा करती है जिस संबंध में उच्च न्यायालय ने अब अपने कड़े रुख दिखाने पर कहा है अगर पुलिस ऐसा करती पाई जाती है तो फिर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है ।

 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पत्रकारों के लिए लड़ने वाले, पत्रकारों के हित में जी जान लगाने वाले हमेशा पत्रकारों के साथ खड़े होकर एक मजबूती के साथ कांधे से कांधा मिलाकर चलने वाले ऐसे दैनिक मुंबई हलचल के संपादक और अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के महाराष्ट्र अध्यक्ष और पत्रकार संघ वेलफेयर एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट दिलशाद एस. खान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सारहना की..?

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