Ahle Bait Hadees In Hindi अहले बैत पर 20 हदीस हिंदी में

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Ahle Bait Hadees In Hindi अहले बैत पर 20 हदीस हिंदी में

अहले बैत कौन हैं / Ahle Bait Kon ( Meaning ) In Hindi?

Ahle Bait Hadees In Hindi - अहले बैत की मुहब्बत हर मुसलमान पर फर्ज है क्योंकि मुहब्बते अहले बैत ईमान की जान और शर्ते ईमान है उनकी मुहब्बत के बगैर किसी शख्स के दिल में ईमान दाखिल नहीं हो सकता.

हदीस पाक Hadees Paak में वारिद है रहमते दो आलम सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया इस्लाम की बुनियाद मेरी और मेरे अहले बैत की मुहब्बत Ahle Bait Ki Muhabbat है,

और हम तमाम मुसलमानों के लिये हुक्मे खुदावन्दी है कि अहले बैत से मुहब्बत Ahle Bait Ki Muhabbat करो अहले बैत की मुहब्बत मुहब्बते रसूल है और मुहब्बते रसूल मुहब्बते खुदा है । 

( हदीस 1 )

हज़रत जाबीर बिन अब्दुल्लाह से रिवायत है फरमाते है मैंने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सुना की “ ऐ लोगो मैं तुम्हारे बीच 2 चीजें छोड़ी है 

1 . अल्लाह की किताब यानी कुरआन और 

2 .  मेरी अहले बैत " जब तक तुम उनका दामन थामे रहोगे गुमराह न होगे । ( जामे तिर्मिजी , जिल्द 6 , बाब किताबुल मनाकिक , हदीस -3786 ) 

( हदीस 2 )

हज़रत मौला अली करीमुल्लाह तआला वजहहुल - करीम फरमाते है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हसनैन करीमैन के हाथ को अपने दस्ते मुबारका में लेकर फरमाया : जो मुझसे मेरे इन दोनों फरजन्दों और उनके वालिदैन से मुहब्बत करेगा वह क्यामत के दिन मेरे साथ होगा और जन्नत के भी उस दर्जा में रखा जायेगा जहां मैं रहूंगा । ( शेफा शरीफ , जिल्द दोम , सफा 59 ) . 

( हदीस 3 )

हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : मेरे अहले - बैत Ahlul Baytउम्मत के लिए अमान ( हिफाजत करने वाला ) हैं । जब अहले - बैत न रहेंगे तो उम्मत पर वह ( कयामत ) आएगा जो उनसे वादा है । ( सवाइके मुहर्रका सफा 514 - अल - अमन वल उला सफा 26 ) 

( हदीस 4 )

बैहकी ने रिवायत किया कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलौह वसल्लम ने फरमाया कि अपनी औलाद को तीन बातें सिखाओ 1. अपने नबी पाक की उल्फत व मुहब्बत 2. अहले - बैते Ahlul Bayt अतहार की उल्फत व मुहब्बत 3. कुरआने करीम की किर्जत ( सवाइके मुहर्रका सफा 577 ) . 

( हदीस 5 )

बैहकी और वैल्मी ने रिवायत किया कि आंहजरत सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने फरमाया : कोई बन्दा - ए - मोमिने कामिल नहीं हो सकता यहां तक कि मैं उसको - उसकी जान से ज्यादा प्यारा न हूँ और मेरी औलाद उसको अपनी जान से ज्यादा प्यारी न हो और मेरे आल उसको अपने आह्ल से ज्यादा महबूब न हों और मेरी जात उसको अपनी जात से ज्यादा महबूब न हो । ( सवानेहे करबला सफा 53 ) 

( हदीस 6 )

इमाम अहमद ने रिवायत किया कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम Sallallahu ala wasallam ने फरमाया : जो शख्स अहले - बैत Ahlul Bayt से बुग्ज रखता है वह मुनाफिक है । ( सवाइके मुहर्रका सफा 764 ) 

( हदीस 7 )

वैल्मी ने रिवायत किया कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाया : जो मुझसे वसीला की तमन्ना रखता हो और यह चाहता हो । उसको मेरी बारगाहें करम में रोजे कयामत हक्के शफाअत हो तो उसे चाहिये कि वह मेरे अहले - बैत Ahl al-Bayt की न्याजमन्दी करे और उनको हमेशा खुश रखे । ( सवाइके मुहर्रका सफः 588 ) . 

( हदीस 8 )

हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : आले मुहम्मद Aale Muhammad से एक दिन की मुहब्बत एक साल की इबादत से बेहतर है और मुझसे और मेरे अहले - बैत Ahl al-Bayt से मुहब्बत रखना सात खतरनाक मकाम पर फायदा बख्श है । ( सवाइके मुहर्रका सफाः 767 ) 

( हदीस 9 )

हजरत अबू - सईद खुदरी रजियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम Sallallahu ala wasallam ने फरमाया : कसम है उस जात की जिसके दस्ते कुदरत में मेरी जान है जिसने मेरे अहले - बैत Ahl al-Bayt से बुग्ज रखा खुदावन्द कुद्स उसको दौज़ख में डालेगा । ( खसाइसुल - कुब्रा जिल्द दोम सफा 496 ) उसके किसी काम की हिफाजत नहीं फरमाएगा । 

( १ ) इस्लाम की इज्जत 

( २ ) मेरी इज्जत 

( ३ ) मेरे कराबत दारों और अहले - बैत की इज्जत । ( सवाइके मुहर्रका सफा 769 

( हदीस 10 )

अमीरुल - मोमिनीन हजरत सैयदना मौला अली मुशकिल कुशा रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया : जो शख्स मेरी इतरत यानी अहले - बैत Ahl al-Bayt और अन्सार के हुकूक को न पहचाने और उनके हुकूक अदा न करे तो उसमें उन तीन बातों में कोई एक बात जरूर होगी -१ या तो वह मुनाफिक होगा २ या जिना की औलाद होगा या फिर ३ वह हैज व निफास - जैसी नापाकी की हालत में उसकी माँ की पेट में रहा होगा । ( Ahle Bait Hadees In Hindi ) ( सवाइके मुहर्रका सफा 580 ) 

( हदीस 11 )

वैल्मी ने हजरत मौला अली रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत की है कि मैं ने हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है कि आपने फरमाया : जो लोग हौजे कौसर पर पहले आएंगे वह मेरे अहले - बैत Ahle-Bait होंगे । ( सवाइके मुहर्रका सफा 622 ) 

( हदीस 12 )

अमीरुल - मोमिनीन हजरत सैयदना उस्मान इब्ने अफ्फान रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : जिस शख्स ने दुनिया में औलादे अब्दुल - मुत्तलिंब या औलादे बनी हाशिम यानी अहले - बैत से कुछ नेकी या अच्छा सुलूक या एहसान किया फिर वह अहले - बैत Ahle-Bait उस का बदला न दे सके तो क्यामत के रोज उस सैयद की तरफ से मैं पूरा - पूरा बदला अता करूंगा । ( सवाइके मुहर्रका सफा : 792 ) 

( हदीस 13 )

हाकिम और वैल्मी ने हजरत अबू - सईद रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : . तीन चीजें ऐसी हैं जो शख्स उन चीजों की हिफाजत करेगा अल्लाह तआला उसकी दुनिया और दीन दोनों की हिफाजत फरमाएगा । और जो शख्स उन बातों को जाए करेगा अल्लाह तआला उसके किसी काम की हिफाजत नहीं फरमाएगा । 

( १ ) इस्लाम की इज्जत 

( २ ) मेरी इज्जत 

( ३ ) मेरे कराबत दारों और अहले - बैत की इज्जत । ( सवाइके मुहर्रका सफा 769 

( हदीस 14 )

हजरत इब्ने अब्बास रजियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमायां : आसमान के तारे अहले जमीन के लिये सफरे दरिया में डूबने से बचाने में बाइसे पनाह और मोजिबे अमान हैं । मेरे अहले - बैत मेरी उम्मत को इखतिलाफ और तफरका में पड़ने से बचाने में बाइसे अमन हैं । जब मेरे अहले - बैत Ahle-Bait से कोई गिरोह इखतिलाफ करके अलग हो जाए तो वह गिरोह शैतानी गिरोह समझा जाएंगा । ( खसाइसुल - कुबरा जिल्द दोम , सफा 497 ) 

( हदीस 15 )

वैल्मी ने हजरत अबी सईद से ब्यान किया है कि रसूलें करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम Sallallahu ala wasallam ने फरमाया : जो शख्स मेरे औलाद के मुतअल्लिक मुझे अजीयत ( तकलीफ ) देगा उस पर सख्त गजबे इलाही नाजिल होगा । ( सवाइके मुहर्रका सफा : 621 ) 

( हदीस 16 )

वैल्मी ने हजरत अबी - सईद से ब्यान किया है कि हुजूर सल्लल्लाहु “ अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो शख्स यह चाहता है कि उसकी उम्र लम्बी हो और अल्लाह तआला ने जो उसे दिया है उससे लुत्फ - अन्दोज हो तो उसे चाहिए कि मेरे अहले - बैत Ahle-Bait के बारे में मेरा अच्छा जानशीन बने । और जो उनके बारे में मेरे बाद उनका अच्छा जानशीन न हुआ तो उसकी उम्र काट दी जायेगी और वह क्यामत के दिन मेरे पास रूस्वाह होकर आएगा । ( सवाइके मुहर्रका सफा : 621 )

( हदीस 17 )

हजरत अनस रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम Sallallahu ala wasallam ने फरमाया : तुम लोग किसी के वास्ते खड़े न हो मगर हसन और हुसैन ( रजियल्लाहु अन्हुमा ) और उनकी औलाद के लिए खड़े रहा करो । ( खसाइसुल - कुबरा , जिल्द 2 सफा : 497 ) 

( हदीस 18 )

हजरत हसन रजियल्लाहु अन्हु से मर्वी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : मुझ पर और मेरे अहले बैत Ahlul Bayt पर सदका हराम कर दिया है । ( खसाइसुल - कुबरा - जिल्द दोम सफा : ४३० ) 

( हदीस 19 )

हजरत उम्मे - सलमा रजियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूल करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : यह मस्जिद मुंबी और हाइजा के लिए हलाल नहीं है मगर मेरे लिए और मौला अली फातिमा और उनके साहिबजादे हसन व हुसैन के लिए हलाल है । ( खसाइसुल - कुबरा जिल्द दोम सफा : 452 ) 

( हदीस 20 )

रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : मैंने अपने रब से दुआ की कि वह अहले - बैत Ahle-Bait में से किसी को आग में दाखिल न फरमाए तो उसने मेरी यह दुआ कुबूल फरमा ली । ( सवाइके मुहर्रका सफा : 622 ) 

अहले बैत की मुहब्बत इम्तेहान 

अहले बैत Ahle Bait की मुहब्बत बड़े सख्त इम्तेहान लेती हैं 

  • अहले बैत की मुहब्बत में :

  1. इमाम निसाई को मिम्बर पर शहीद किया गया , 

  2. इमाम बुखारी के जनाजे पे कोई नही आया , 

  3. इमाम हाकिम पर कुफ्र का फतवा दिया गया , 

  4. इमामे आजम अबु हनीफा को जहर देकर शहीद किया गया इमाम मालिक के हाथ उखाड़े गए , 

  5. इमाम अहमद इब्ने हम्बल को शहर से बाहर कर दिया गया , 

  6. इमाम शाफई को इस कदर परेशान किया कि मक्का छोड़ कर मिस्र चले गए और इन हजरात पर शियत का फतवा दिया गया , जिसके जवाब में इमाम शाफई ने फरमाया , “ हुजूर के अहलेबैत की मोहब्बत अगर शियत है तो मैं शिया हूँ । ”

   अहले बैत के नाम

   अहले बैत के नाम ahle bait-ahlul bayt ke family names-naam-tree

  • रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम / Rasule Karim Sallallahu ala wasallam

  • बीबी फातिमा / Bibi Fatima Zahra Razi Allah Tala Anha 

  • हज़रात अली रजि अल्लाहु अन्हु / Hazrat Ali Razi Allah Tala Anhu

  • हज़रात इमाम हसन रजि अल्लाहु अन्हु / Hazrat Imam Hasan Razi Allah Tala Anhu

  • हज़रात इमाम हुसैन रजि अल्लाहु अन्हु / Hazrat Imam Hussain Razi Allah Tala Anhu

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